यूपी के हरित भविष्य के लिए आई-फॉरेस्ट से करार

यूपी के हरित भविष्य के लिए आई-फॉरेस्ट से करार

लखनऊ20 मार्च (एजेंसियां)। पर्यावरणीय स्थिरता और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण निदेशालय ने इंटरनेशनल फोरम फॉर एनवायरनमेंटसस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी (आई फॉरेस्ट) के साथ एमओयू किया। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश में सतत विकास को बढ़ावा देना और प्रदूषण की समस्या का निवारण करना है। गुरुवार को पर्यावरण निदेशालय कार्यालय में पर्यावरणवन व जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेनाराज्य मंत्री के.पी. मलिकमुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह आदि की मौजूदगी में यह एमओयू हुआ।

तीन वर्षीय यह एमओयू प्रमुख पर्यावरणीय चुनौतियों पर केंद्रित होगाजिसमें वायु प्रदूषण नियंत्रणकचरा प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन की समस्या के लिए समाधान विकसित करना शामिल है। यह उत्तर प्रदेश में हरित ऊर्जाउद्योगों और शहरों के सतत् विकास को प्रोत्साहित करेगा। इस समझौते के तहत आई फॉरेस्ट शोध आधारित अनुसंधान व प्रशिक्षण कार्यक्रम कराएगा। साथ ही सरकारी योजनाओं को लागू करने में पर्यावरण निदेशालय का सहयोग करेगा। यह साझेदारी पर्यावरण संरक्षण में धार्मिक संस्थानों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देगी। इस पहल की शुरुआत महाकुंभ 2025 के दौरान हुईजहां दोनों पक्षों ने संयुक्त रूप से प्रथम कुंभ की आस्था और जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का आयोजन किया।

वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि उत्तर प्रदेश अद्वितीय और जटिल पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। हमारी सरकार वायु गुणवत्ता में सुधारऔद्योगिक उत्सर्जन को नियंत्रित करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल में अग्रणी रही है। इस साझेदारी के माध्यम से हम नई तकनीकों और समाधानों का अन्वेषण करेंगेताकि प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सके। मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने विज्ञान और अनुसंधान आधारित समाधानों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि पर्यावरणीय समस्याओं को हल करने के लिए अत्याधुनिक शोध और ज्ञान का विकास जरूरी है। उम्मीद है कि पर्यावरण निदेशालय और आई फॉरेस्ट के बीच यह एमओयू वायु प्रदूषणकचरा प्रबंधन और नदी प्रदूषण जैसी चुनौतियों के लिए ज्ञान आधारित समाधान प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने कहा कि यह सहयोग वायु प्रदूषण प्रबंधनहरित उद्योगों के विकासहीटवेव जैसी जलवायु चुनौतियों के लिए शहरों की तैयारी और जलवायु नीतियों को सुदृढ़ करने में सहायक होगा। आई फॉरेस्ट तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगापायलट परियोजनाएं संचालित करेगाहितधारकों का प्रशिक्षण करेगा और पर्यावरण प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए अनुसंधान का समर्थन करेगा। आई फॉरेस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्रभूषण ने इस साझेदारी की रूपरेखा प्रस्तुत की

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