भारत में वापस चाहिए कच्चातिवु द्वीप
तमिलनाडु विधानसभा में सर्व-समर्थन से प्रस्ताव पारित
चेन्नई, 02 अप्रैल (एजेंसियां)। कच्चातिवु द्वीप को वापस लेने के लिए तमिलनाडु विधानसभा में आज एक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव को लेकर सीएम स्टालिन ने कहा कि इस द्वीप को वापस पाना ही इस समस्या का हल है और केंद्र सरकार को श्रीलंका के साथ समझौते में संशोधन करना चाहिए।
तमिलनाडु में एक बार फिर कच्चातिवु द्विप लेकर राजनीतिक गलियारे में सियासी हलचल तेज हो गई है। तमिलनाडु विधानसभा ने बुधवार को कच्चातिवु द्वीप को वापस लेने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया, जिसे सभी राजनीतिक दलों ने सर्वसम्मति से समर्थन दिया। विधानसभा के स्पीकर अप्पावु ने इस प्रस्ताव की घोषणा की। प्रस्ताव के पारित होने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विपक्ष द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब दिया। बता दें कि विपक्ष के नेता पलानीस्वामी ने डीएमके पर आरोप लगाया था कि सत्ता में रहते हुए सरकार ने इस मुद्दे को अनदेखा किया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कच्चातीवु द्वीप को वापस लेने के प्रस्ताव पर अब बात हो रही है, लेकिन पुरानी राजनीति को छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने (एआईएडीएमके) की सरकार पर भी सवाल उठाए। साथ ही कहा कि जब आपकी सरकार 10 साल तक सत्ता में थी, तब आपने इस मुद्दे पर क्या किया? क्या आपने कभी इस पर बात की? इसके साथ ही स्टालिन ने कच्चातीवु द्वीप के पास श्रीलंकाई नौसेना द्वारा तमिलनाडु के मछुआरों की गिरफ्तारी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि 2024 में अब तक 500 से अधिक मछुआरों को गिरफ्तार किया गया है, और यह स्थिति रोज़ बढ़ती जा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कच्चातीवु द्वीप को वापस पाना ही इस समस्या का हल है और केंद्र सरकार को श्रीलंका के साथ समझौते में संशोधन करना चाहिए।
हालांकि इससे पहले विपक्ष के नेता एडप्पादी पलानीस्वामी ने कच्चातीवु के श्रीलंका को हस्तांतरण का इतिहास बताया। सात ही डीएमके पर आरोप लगाया कि उन्होंने सत्ता में रहते हुए इस मुद्दे की अनदेखी की। पलानीस्वामी ने कहा कि 1974 में जब कच्चातीवु श्रीलंका को दिया गया था, तब तमिलनाडु में डीएमके की सरकार थी। पलानीस्वामी ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता ने 2008 में कच्चातीवु को वापस पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया था, लेकिन यह मामला अभी भी अनसुलझा है। इसके साथ ही पलानीस्वामी ने डीएमके पर आरोप लगाते हुए कहा कि डीएमके ने इस मुद्दे को राजनीतिक कारणों से उठाया है, क्योंकि 2026 के चुनाव से पहले यह एक चुनावी मुद्दा बन गया है।