13000 वर्ग किमी वन क्षेत्र पर अवैध कब्जा
केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया
मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा भूमि पर अवैध कब्जा
यूपी में 265 वर्ग किलोमीटर भूमि अवैध कब्जे में
नई दिल्ली, 02 अप्रैल (एजेंसियां)। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष यह स्वीकार किया है कि देश के 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक वन क्षेत्र पर अतिक्रमण किया गया है। यह इतना बड़ा क्षेत्र है कि इतने में नौ दिल्ली (कुल क्षेत्रफल 1,484 वर्ग किलोमीटर) बसाई जा सकती है। यह जमीन दिल्ली, सिक्किम और गोवा के कुल भौगोलिक क्षेत्र से भी अधिक है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 तक 25 राज्
मध्य प्रदेश में सबसे अधिक वन (5,460.9 वर्ग किलोमीटर) पर अतिक्रमण था। असम में 3,620.9 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र अतिक्रमण के अधीन है। वहीं, कर्नाटक में कुल 863.08 वर्ग किलोमीटर, महाराष्ट्र में 575.54 वर्ग किलोमीटर, अरुणाचल प्रदेश में 534.9 वर्ग किलोमीटर और ओड़ीशा में 405.07 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर अतिक्रमण है। उत्तर प्रदेश में 264.97 वर्ग किलोमीटर, मिजोरम में 247.72 वर्ग किलोमीटर, झारखंड में 200.40 वर्ग किलोमीटर और छत्तीसगढ़ में 168.91 वर्ग किलोमीटर वन भूमि अतिक्रमण के अधीन है।
तमिलनाडु में यह आंकड़ा 157.68 वर्ग किलोमीटर और आंध्र प्रदेश में 133.18 वर्ग किलोमीटर, गुजरात में 130.08 वर्ग किलोमीटर, पंजाब में 75.67 वर्ग किलोमीटर, उत्तराखंड में 49.92 वर्ग किलोमीटर, केरल में 49.75 वर्ग किलोमीटर, त्रिपुरा में 42.42 वर्ग किलोमीटर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 37.42 वर्ग किलोमीटर और मणिपुर में 32.7 वर्ग किलोमीटर है। जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अभी वन अतिक्रमण पर विवरण नहीं दिया है, उनमें बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, नगालैंड, दिल्ली, जम्मू-
रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 409.77 वर्ग किलोमीटर वन भूमि अतिक्रमण मुक्त की जा चुकी है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि मार्च 2024 तक अतिक्रमण के तहत कुल वन भूमि से इस क्षेत्र को बाहर रखा गया था या नहीं। वन क्षेत्र या रिकॉर्डेड फॉरेस्ट एरिया (आरएफए) में सरकार की तरफ से आधिकारिक तौर पर वन के रूप में नामित भूमि शामिल है, भले ही उस पर पेड़ न हों।