नेपाल सीमा से हो रही टेरर फंडिंग और सोने की तस्करी
नकली नोटों और मनी लॉन्ड्रिंग का धंधा खुलेआम
सोनौली (नेपाल सीमा), 02 अप्रैल (एजेंसियां)। नेपाल से सटे सीमावर्ती क्षेत्रों में सभी करेंसी बदलने की अवैध सुविधा है। इसके लिए देश और मांग के हिसाब से तीन से चार प्रतिशत तक कमीशन तय है। यहां सोने की तस्करी के लिए भी कमीशन तय होता है। भार-नेपाल बॉर्डर पर नकली नोटों के धंधे के साथ-साथ काले नोटों को सफेद करने (मनी लॉन्ड्रिंग) का धंधा भी बेखौफ चल रहा है।
नेपाल बॉर्डर पर करीब साढ़े छह सौ किलोमीटर के विस्तृत भ्रमण के दौरान सीमा के सात जिलों में पीलीभीत से महराजगंज तक तस्करों का मजबूत नेटवर्क सामने दिखता है। गेहूं के साथ राइस ब्राउन का खेल खुलेआम हो रहा है। सोने की सौदेबाजी हो रही है। मनी एक्सचेंज का काला कारोबार बेतहाशा हो रहा है। सीमा पर हर करेंसी को 3 से 4 फीसदी कमीशन में नेपाली और भारतीय रुपए में बदलने का पूरा इंतजाम है। इसका खामियाजा नेपाल अंतरराष्ट्रीय वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की ग्रे सूची की कार्रवाई के रूप में भुगत रहा है। संस्था के अनुसार नेपाल टेरर फंडिंग के लिए सुरक्षित ठिकाना है। इसकी एक कड़ी अवैध मनी एक्सचेंज भी है।
मनी एक्सचेंज में कमीशन देश, मांग और जरूरत के हिसाब से बदलता रहता है। बहराइच जिले के रुपईडीहा बॉर्डर पर तीन प्रतिशत पर भारतीय दो हजार रुपए को नेपाली मुद्रा में बदला जा रहा है। वहां पाकिस्तानी करेंसी भी बदली जा रही है। धंधे के एक एजेंट ने कहा, कितनी भी करेंसी हो एक्सचेंज होगी। सिद्धार्थनगर से लगती सीमा पर तो ब्रिटेन के पाउंड स्टर्लिंग, अमेरिकी डॉलर, संयुक्त अरब अमीरात के दिरहम, दक्षिण कोरियाई वॉन और चीनी युआन करेंसी के भी एक्सचेंज की सुविधा खुलेआम मिल रही है। बॉर्डर पर मिले आबिद ने दावा किया कि कितनी भी करेंसी हो एक्सचेंज होगी। बस कुछ समय लगेगा। महराजगंज जिले में सोनौली बॉर्डर पर मनी एक्सचेंज की दुकानें खुलेआम सजी हुई हैं। नौतनवा में डॉलर और दिरहम का एक्सचेंज हो रहा है। कमीशन पर सौदेबाजी होती है। इसका तीसरा बड़ा केंद्र ठूठीबारी है। निचलौल रोड से कोतवाली गेट से पहले तक भारतीय रुपए को नेपाली और नेपाली को भारतीय में बदलने की सुविधा खुलेआम मिलती है, लेकिन दिरहम और डॉलर के लिए थोड़ी मुश्किल और थोड़ा मोलभाव ज्यादा होता है। पान के एक दुकान में ही सारी करेंसी बदली जा रही है, खुलेआम।
नेपाल से लगते भारतीय क्षेत्रों में अवैध मनी एक्सचेंज देश की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। आईबी और एसएसबी के अधिकारी यह कहते तो हैं, लेकिन इस धंधे को रोकना अब इनके बस में नहीं है। सोनौली बॉर्डर पर मौजूद एक व्यक्ति ने बताया कि अवैध मनी एक्सचेंज में कमीशन सोने की तस्करी पर निर्भर करता है। सोना तस्करी बढ़ेगी तो कमीशन भी बढ़ेगा। तस्करी घटी तो कमीशन भी उसी के साथ घटेगा। नवंबर से जनवरी के बीच कमीशन सात प्रतिशत तक पहुंच गया था। यानि, नेपाल से सोना भारत लाया जा रहा है। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल से हर साल करीब 10 टन सोने की तस्करी भारत में की जाती है। फाउंडेशन का दावा है कि सोने के बाद नेपाल से सबसे ज्यादा मानव तस्करी होती है।
मनी एक्सचेंज का सीधा जुड़ाव मनी लॉन्ड्रिंग से है। इसका उपयोग नेपाल में टेरर फंडिंग के रूप में किया जा रहा है। इसके प्रमाण मिलने के बाद एफएटीएफ ने नेपाल को ग्रे सूची में शामिल कर दिया है। भारत-नेपाल संबंधों के जानकार बताते हैं कि इस सूची में उन देशों को ही शामिल किया जाता है जो आतंकवाद के वित्तपोषण और धन शोधन के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। विदेशों से नेपाल के बैंक खातों में धन भेजा जाता है। नेपाली करेंसी में रकम निकालकर भारत पहुंचाई जाती है। यहां से भारतीय रुपए में बदलकर काठमांडू पहुंचाया जाता है। यह पैसा टेरर फंडिंग के काम आता है।