कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामैया ने बहु-राज्यीय लड़ाई को दिया समर्थन
परिसीमन विवाद मामला
बेंगलूरु/शुभ लाभ ब्यूरो| कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामैया ने संसद सीटों के परिसीमन पर केंद्र सरकार से लड़ने के लिए तमिलनाडु द्वारा बनाए जा रहे बहु-राज्यीय गठबंधन में शामिल होने पर सहमति जताई है|
सिद्धरामैया ने तमिलनाडु के वन मंत्री के पोनमुडी और राज्यसभा सदस्य एम एम अब्दुल्ला के साथ यहां अपनी बैठक के दौरान समर्थन व्यक्त किया| प्रतिनिधिमंडल सिद्धरामैया को संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) में शामिल होने के लिए आमंत्रित करने आया था, जिसे तमिलनाडु केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पंजाब के साथ मिलकर बना रहा है|
प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार से भी मुलाकात की| सिद्धरामैया के कार्यालय से जारी एक बयान के अनुसार, उन्होंने तमिलनाडु के अपने समकक्ष एम के स्टालिन से भी फोन पर बात की| बयान में कहा गया मुख्यमंत्री सिद्धरामैया ने दक्षिणी राज्यों की लड़ाई को अपना समर्थन दिया| बयान में कहा गया है कि सिद्धरामैया ने तमिलनाडु प्रतिनिधिमंडल से कहा कि कर्नाटक बिना किसी हिचकिचाहट के केंद्र सरकार के किसी भी कदम की निंदा करेगा जो राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाता है, लोकतंत्र को कमजोर करता है और संघवाद के खिलाफ है|
स्टालिन २२ मार्च को चेन्नई में जेएसी की पहली बैठक की मेजबानी कर रहे हैं, ताकि परिसीमन पर आगे की सामूहिक दिशा तय की जा सके| स्टालिन ने कहा रिपोर्ट बताती है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन की कवायद पर विचार किया जा रहा है, जिसके दो संभावित तरीके हैं| उन्होंने बताया पहले मामले में, मौजूदा ५४३ सीटों को राज्यों के बीच फिर से वितरित किया जा सकता है और दूसरे मामले में, सीटों की कुल संख्या ८०० से अधिक हो सकती है|
दोनों परिदृश्यों में, यदि यह कवायद २०२६ के बाद की जनसंख्या पर आधारित है, तो सभी राज्य जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया है, उन्हें काफी नुकसान होगा| हमें जनसंख्या वृद्धि को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों को बनाए रखने के लिए इस तरह दंडित नहीं किया जाना चाहिए|
पिछले साल जीएसटी परिषद में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करने वाले राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा था कि अगर नई जनगणना के आधार पर परिसीमन होता है तो दक्षिण भारत में संसद की सीटों की संख्या १२९ से घटकर १०३ रह सकती है| उन्होंने कहा हम नई जनगणना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन १९७१ की जनगणना की आनुपातिकता को बनाए रखा जाना चाहिए|