मंदिर उत्सव में सीपीएम के झंडे क्यों लगाए?
केरल हाईकोर्ट ने मंदिर बोर्ड को लगाई फटकार
तिरुवनंतपुरम, 19 मार्च (एजेंसियां)। केरल हाईकोर्ट ने 10 मार्च को कोलम के कडक्कल देवी मंदिर उत्सव के दौरान राजनीतिक प्रतीकों और संगीत के प्रदर्शन पर नाराजगी व्यक्त की है। केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार 18 मार्च को मंदिर परिसर के अंदर ऐसी गतिविधियों की अनुमति देने के लिए त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड को फटकार लगाई। उत्सव के दौरान सत्ताधारी पार्टी सीपीआईएम और उसके छात्र विंग के झंडे लगाए गए थे।
इसको लेकर एडवोकेट विष्णु सुनील ने केरल हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल की। याचिका में सुनील ने कहा कि कडक्कल देवी मंदिर उत्सव के दौरान सीपीएम और उसकी युवा शाखा डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के राजनीतिक झंडे लगाए। इसके साथ ही वामपंथी राजनीतिक समूहों से जुड़े क्रांतिकारी गीत भी बजाए गए। इसके अलावा, कई तरह श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाया गया।
याचिकाकर्ता ने कहा कि मंदिर उत्सव के दौरान गायक अलोशी एडम को संगीत प्रदर्शन के बुलाया गया था, जो बेहद गैरकानूनी था। इससे भक्तों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने तर्क दिया यह प्रदर्शन कभी भी मंदिर उत्सव का हिस्सा नहीं रहा। एडवोकेट ने कहा कि यह प्रदर्शन धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, जो संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मंदिर का प्रबंधन करने वाला त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड यह सुनिश्चित करने में विफल रहा कि मंदिर परिसर का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए न किया जाए। इसके बाद न्यायमूर्ति अनिल के नरेंद्रन और न्यायमूर्ति मुरली कृष्णा की खंडपीठ ने मंदिर परिसर के अंदर राजनीतिक प्रदर्शन के आयोजन की आलोचना की।
कोलम के कडक्कल देवी मंदिर का प्रबंधन करने वाले बोर्ड को फटकार लगाते हुए केरल हाईकोर्ट ने म्यूजिक परफॉर्मेंस के लिए उससे जवाब मांगा है। अदालत ने कहा, आपने मंच पर किस तरह की सजावट की है? क्या यह कोई कॉलेज उत्सव है? आपने ऐसा करने के लिए भक्तों से पैसे लिए हैं! यह मंदिर का उत्सव है। क्या इसमें फिल्मी गानों के बजाय भक्ति गीतों की प्रस्तुति नहीं होनी चाहिए? एडवोकेट विष्णु सुनील की याचिका को स्वीकार कर लिया और कडक्कल देवी मंदिर सलाहकार समिति एवं अन्य प्रतिवादियों से इस पर जवाब मांगा। उत्सव के वीडियो देखने के बाद अदालत ने एक अंतरिम आदेश पारित किया है। इस आदेश में कहा गया है, वीडियो क्लिप देखने के बाद हम पाते हैं कि 10 मार्च को वार्षिक उत्सव में होने वाली गतिविधियां मंदिर में स्वीकार नहीं की जा सकतीं।
इस मामले में केरल हाईकोर्ट ने मंदिर बोर्ड को चेतावनी देते हुए कहा कि उनके द्वारा प्रबंधित किसी भी मंदिर में ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने निर्देश में आगे कहा, त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड यह सुनिश्चित करेगा कि उसके प्रबंधन के तहत किसी भी मंदिर के उत्सव में ऐसी गतिविधि न हो। वहीं, मंदिर बोर्ड ने कहा कि मंदिर सलाहकार समिति ने उसे सूचित किए बिना ही संगीत कार्यक्रम आयोजित किया था। हालांकि, कोर्ट मंदिर बोर्ड यानी त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के इस दलील से सहमत नहीं हुआ। हाईकोर्ट ने कहा, हम बोर्ड द्वारा अपनाए गए रुख से प्रथम दृष्टया प्रभावित नहीं हैं। जैसा कि वीडियो में देखा जा सकता है कि Lईडी स्क्रीन और फ्लैश लाइट से सुसज्जित मंच पर विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए बड़ी रकम खर्च की गई है। कोर्ट ने कहा कि मंदिर के धन के इस तरह के दुरुपयोग को रोका जा सकता था।
न्यायालय ने कहा, किसी भी संगठन या भक्तों के समूह को मंदिर उत्सवों के आयोजन के लिए भक्तों या जनता से धन एकत्र करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। किसी भी तरह के धन संग्रह का काम बोर्ड की अनुमति से ही होना चाहिए, जैसा कि आमतौर पर निर्माण गतिविधियों के मामले में किया जाता है। इसके साथ ही एकत्र किए गए सभी धन का सरकार द्वारा ऑडिट किया जाएगा। सुनवाई के दौरान त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि मुख्य सतर्कता और सुरक्षा अधिकारी (पुलिस उपनिरीक्षक) को घटना की जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। साथ ही मंदिर सलाहकार समिति को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट ने कहा कि पिछले निर्णयों में उसने मंदिर समितियों द्वारा एकत्रित मंदिर फंड की सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।