अंतरिक्ष में परचम लहरा कर पृथ्वी पर लौटीं सुनीता विलियम्स
आठ दिन का अभियान नौ माह 13 दिन के अंतरिक्ष प्रवास में बदला
ट्रंप का दृढ़ वादा और मस्क का दृढ़ इरादा काम आया
सुरक्षित वापसी में नासा व स्पेसएक्स का नायाब श्रम
पीएम मोदी ने सुनीता को भारत की शानदार बेटी कहा
पीएम मोदी ने सुनीता को भारत आने का न्यौता दिया
फ्लोरिडा, 19 मार्च (एजेंसियां)। नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) से संबद्ध भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर धरती पर सुरक्षित वापस लौट आए। फ्लोरिडा के तट पर उनकी सफल लैंडिंग हुई। दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर स्पेसएक्स क्रू-9 वापस धरती पर आ गया। नासा के ये दोनों अंतरिक्ष यात्री मात्र आठ दिन के मिशन पर गए थे, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण दोनों नौ माह और 13 दिन तक अंतरिक्ष में फंसे रहे। उनकी वापसी का श्रेय अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी एलन मस्क को जाता है, जिन्होंने अंतरिक्ष प्रयोगशाला में फंसी सुनीता विलियम्स को सुरक्षित वापस लाने का वादा किया था। तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी के मसले पर कतई गंभीर नहीं थे।
सुनीता विलियम्स की वापसी के पहले ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें पत्र लिख कर अपनी एवं सम्पूर्ण देशवासियों की शुभकामनाएं दी थी। पीएम मोदी ने सुनीता विलियम्स को भारत आने का न्यौता भी दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में कहा, भले ही आप हजारों मील दूर हों, लेकिन आप हमारे दिलों के करीब हैं। भारत के लोग आपके अच्छे स्वास्थ्य और आपके मिशन में सफलता के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। आपकी वापसी के बाद हम भारत में आपसे मिलने के लिए उत्सुक हैं। भारत के लिए अपनी सबसे शानदार बेटियों में से एक की मेजबानी करना खुशी की बात होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुनीता विलियम्स को 1 मार्च 2025 को पत्र लिखा था। पीएम मोदी ने लिखा, मैं आपको भारत के लोगों की ओर से शुभकामनाएं देता हूं। आज एक कार्यक्रम में मेरी मुलाकात प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री माइक मैसिमिनो से हुई। हमारी बातचीत के दौरान आपका नाम आया और हमने चर्चा की कि हमें आप पर और आपके काम पर कितना गर्व है। इस बातचीत के बाद, मैं खुद को आपको पत्र लिखने से नहीं रोक पाया। भारत के 140 करोड़ लोगों को आप पर गर्व है। हाल की घटनाओं ने एक बार फिर आपकी दृढ़ता को दर्शाया है। भले ही आप हजारों मील दूर हैं, लेकिन आप हमारे दिल के करीब हैं। भारत के लोग आपके कुशल स्वास्थ्य और आपके मिशन में सफलता के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। सुनीता विलियम्स के साथ मुलाक़ात का जिक्र भी पीएम मोदी ने किया। पीएम मोदी ने उनके पिता के साथ 2016 में हुई मुलाक़ात की भी चर्चा की और विलियम्स को भारत की सबसे शानदार बेटियों में से एक बताया। पीएम मोदी ने इच्छा जताई कि वह उनकी धरती पर वापसी के बाद उनसे मिलना चाहेंगे।
गौरतलब है कि सुनीता विलियम्स पिछले 9 महीने से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में फंस गई थीं। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट द्वारा अंतरराष्ट्रीय 5 जून 2024 को भेजा गया था। उनका मिशन केवल आठ दिनों का था, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण वे वहां नौ महीने से अधिक समय तक फंसे रहे। नासा के अनुसार, अंतरिक्ष यात्री निक हेग, सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर और अलेक्जेंडर गोरबुनोव स्थानीय समय के मुताबिक शाम 5:57 बजे (भारतीय समयानुसार सुबह 3.27 बजे) पृथ्वी पर लौट आए। स्पेसएक्स रिकवरी जहाजों पर सवार टीमों ने अंतरिक्ष यात्रियों को वापस निकाला। इस तरह नासा के स्पेसएक्स क्रू-9 ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए एजेंसी के नौवें वाणिज्यिक क्रू रोटेशन मिशन को पूरा किया। यह अमेरिका की खाड़ी में फ्लोरिडा के तल्हासी तट से स्पेसएक्स ड्रैगन अंतरिक्ष यान में सुरक्षित रूप से उतरा। नासा की कार्यवाहक प्रशासक जेनेट पेट्रो ने कहा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर नासा और स्पेसएक्स की एक महीने की मेहनत रंग लाई। अंतरराष्ट्रीय चालक दल और धरती पर मौजूद हमारी टीमों ने सभी को घर वापस लाने में कड़ी मेहनत की।
सुनीता विलियम्स और विल्मोर ने अपने मिशन के दौरान 121,347,491 मील की यात्रा की। अंतरिक्ष में 286 दिन बिताए और पृथ्वी के चारों ओर 4,576 परिक्रमा पूरी की। दूसरी तरफ हेग और गोरबुनोव ने अपने मिशन के दौरान 72,553,920 मील की यात्रा की, अंतरिक्ष में 171 दिन बिताए और पृथ्वी के चारों ओर 2,736 परिक्रमा पूरी की। हेग ने अपने दो मिशनों में अंतरिक्ष में 374 दिन और विलियम्स ने अपनी तीन उड़ानों में अंतरिक्ष में 608 दिन बिताए हैं। विल्मोर ने अपनी तीन उड़ानों में अंतरिक्ष में 464 दिन बिताए हैं।
सुनीता विलियम्स ने दो स्पेसवॉक किए। एक में उनके साथ विल्मोर और दूसरे में हेग शामिल थे। अंतरिक्ष में 900 घंटे से अधिक समय तक शोध के साथ 150 से अधिक अद्वितीय वैज्ञानिक प्रयोग किए गए। इस शोध में पौधों की वृद्धि और गुणवत्ता पर जांच शामिल थी, साथ ही रक्त रोगों, ऑटोइम्यून विकारों और कैंसर को संबोधित करने के लिए स्टेम सेल तकनीक की क्षमता भी शामिल थी। उन्होंने प्रकाश व्यवस्था का भी परीक्षण किया। इस अध्ययन के लिए अंतरिक्ष स्टेशन के बाहरी हिस्से से नमूने लिए कि क्या सूक्ष्मजीव अंतरिक्ष में जीवित रह सकते हैं।
भारतीय समयानुसार सुबह 3.27 बजे ऑर्बिट बर्न का प्रोसेस पूरा होने के बाद फ्लोरिडा के तट पर अंतरिक्ष परी के उतरते ही सुनीता विलियम्स के गुजरात के पैतृक गांव में जश्न शुरू हो गया। इतिहास रचकर धरती पर सकुशल वापस लौटीं सुनीता विलियम्स का स्वागत समुद्र में तैरते डॉल्फिन के झुंड ने किया। जब उनका कैप्सूल पानी में उतरा तो उनके आसपास बड़ी संख्या में डॉल्फिन थीं। इसके बाद उनको रिकवरी पोत से कैप्सूल से निकाला गया। उल्लेखनीय है कि सुनीता विलियम्स का जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो के यूक्लिड में हुआ था। वे भारतीय मूल की हैं। उनके पिता दीपक पांड्या मूल रूप से गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव के रहने वाले थे, जो बाद में अमेरिका में न्यूरोएनाटॉमी के क्षेत्र में काम करने लगे। सुनीता ने माइकल विलियम्स से शादी की, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं है।
मिशन की सफलता पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में, नासा ने इस लंबे प्रवास के दौरान आई चुनौतियों और स्पेसएक्स के योगदान पर प्रकाश डाला और उनको धन्यवाद कहा। नासा अधिकारियों के अनुसार, ड्रैगन क्रू कैप्सूल की विश्वसनीयता और टीम के समर्पण ने इस मिशन को सफल बनाया। सुनीता विलियम्स ने सुरक्षित वापसी के बाद हाथ हिलाकर खुशी जाहिर की और मिशन के दौरान अपने अनुभव साझा किए। नासा ने यह भी बताया कि इस मिशन से मिले अनुभवों का उपयोग भविष्य में अंतरिक्ष यात्राओं को और सुरक्षित और प्रभावी बनाने में किया जाएगा।
स्पेसएक्स का यह क्रू मिशन 15 मार्च को लॉन्च किया गया था, जिसमें कुछ तकनीकी चुनौतियों के कारण देरी हुई। हालांकि, 17 घंटे की यात्रा के बाद अंतरिक्ष यात्री सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौट आए। इस मिशन की सफलता के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलन मस्क को विशेष रूप से जिम्मेदारी सौंपी थी। सुनीता विलियम्स और अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी से जुड़ी हर अपडेट के लिए जनसत्ता के लाइव ब्लॉग से जुड़े रहें।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा, नासा के क्रू-9 की पृथ्वी पर सुरक्षित वापसी से मैं प्रसन्न हूं। भारत की बेटी सुनीता विलियम्स और अन्य अंतरिक्ष यात्रियों वाले चालक दल ने अंतरिक्ष में मानव धीरज और दृढ़ता के इतिहास को फिर से लिखा है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह बोले, यह गौरव और राहत का पल है। पूरा विश्व भारत की इस बेटी की सुरक्षित वापसी का जश्न मनाने के लिए एक साथ आया है, जो अंतरिक्ष में अनिश्चितताओं को सहन करने के साहस, दृढ़ विश्वास और स्थिरता के लिए इतिहास में दर्ज हो गई है।
सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर जब क्रू ड्रैगन कैप्सूल के जरिए पृथ्वी पर लौट रहे थे, तो बहुत लोगों को पूर्व भारतीय अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की याद आ रही थी। यह बहुत ही स्वाभाविक बात है। दो दिन पहले ही कल्पना चावला का जन्मदिन था। सुनीता विलियम्स के चचेरे भाई दिनेश रावल ने मंगलवार सुबह गुजरात के अहमदाबाद में उनकी सुरक्षित धरती पर वापसी के लिए यज्ञ का आयोजन किया। सुनीता विलियम्स के धरती पर लौटने की खुशी में पूरे देश में उत्साह का माहौल है। हर कोई अपने तरीके से उनके सुरक्षित धरती पर उतरने की कामना कर रहा है। कई जगह मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों पर प्रार्थना की जा रही है। सुनीता के गांव वाले उनकी सुरक्षा के लिए प्रार्थना कर रहे थे और उन्होंने देवी डोला माता के स्थानीय मंदिर में अखंड ज्योति जलाई थी।
सुनीता विलियम्स ने एक साथ तोड़े कई रिकॉर्ड
फ्लोरिडा, 19 मार्च (एजेंसियां)। 5 जून 2024 को जब भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बैरी विल्मोर बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पहुंचे थे, तब किसी ने सोचा नहीं था कि उनका आठ दिन लंबा मिशन 9 महीनों से ज्यादा समय के लिए खिंच जाएगा। अब अमेरिकी समयानुसार 18 मार्च को देर शाम जब सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर पृथ्वी पर लौटे, तो वे आईएसएस पर 286 दिन बिता चुके थे। इस लंबी अवधि में सुनीता विलियम्स ने कई रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। इनमें स्पेसवॉक से लेकर स्पेसशिप में समय बिताने तक के रिकॉर्ड हैं।
सुनीता विलियम्स अब तक तीन बार अंतरिक्ष मिशन पर जा चुकी हैं। इनमें 2006, 2013 और 2024 के स्पेस मिशन शामिल हैं। जहां उन्होंने कुल मिलाकर 608 घंटे अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर बिताए हैं। नासा के किसी अंतरिक्ष यात्री के लिहाज से यह अंतरिक्ष में दूसरी सबसे ज्यादा अवधि है। अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों में उनसे आगे सिर्फ पेगी व्हिटमोर हैं, जिन्होंने आईएसएस पर 675 दिन बिताए हैं। हालांकि, दुनियाभर के अंतरिक्ष यात्रियों की बात करें तो रूस के आगे नासा के एस्ट्रोनॉट कहीं नहीं ठहरते। इस मामले में रिकॉर्ड है रूसी कॉस्मोनॉट ओलेग कोनोनेंको के पास, जो कि पिछले साल जून में ही 33 महीने यानी 1000 दिन स्पेस में रहने का रिकॉर्ड कायम किया था। उन्होंने इसके साथ ही रूसी कॉस्मोनॉट और साथी गेनाडी पडालका का रिकॉर्ड तोड़ा था।
सुनीता विलियम्स ने आईएसएस पर इस बार अपना सबसे लंबे समय तक रहने का रिकॉर्ड बनाया। एक बार में 286 दिन तक अंतरिक्ष में रहकर सुनीता नासा की रिकॉर्ड बुक में भी अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं। दरअसल, अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों की बात करें तो एक दौरे में सबसे ज्यादा दिन तक आईएसएस पर रहने का रिकॉर्ड अब तक फ्रैंक रूबियो के पास है। वहीं, मार्क वांडे हेई अब तक 355 दिन आईएसएस पर बिताए हैं। इसके बाद स्कॉट केली, महिला अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टिना कॉश और पेगी व्हिट्सन का नंबर है। इस लिहाज से एक दौरे में आईएसएस पर सबसे ज्यादा दिन बिताने वाले अंतरिक्ष यात्रियों में सुनीता विलियम्स छठे नंबर पर काबिज हो गई हैं। हालांकि, इसके लिए उन्होंने इस बार अंतरिक्ष यात्री एंड्रयू मोर्गन का 272 दिन का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
59 वर्षीय सुनीता विलियम्स ने 62 घंटे 9 मिनट तक स्पेसवॉक किया, जो किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री की तरफ से किया गया सबसे लंबा समय है। उन्होंने ताजा मिशन में 16 और 30 जनवरी को दो महत्वपूर्ण स्पेसवॉक किए, जिनमें से एक 5 घंटे 26 मिनट और दूसरा 6 घंटे का था। इतना ही नहीं, उनके मिशन के दौरान उन्हें आईएसएस का कमांडर भी बनाया गया, जो किसी भी अंतरिक्ष यात्री के लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। इतना ही नहीं सुनीता विलियम्स अब तक नौ बार स्पेसवॉक में हिस्सा ले चुकी हैं, जो कि पेगी व्हिट्सन के 10 स्पेसवॉक से कम है। हालांकि, अवधि में सुनीता का रिकॉर्ड पेगी से आगे है। नासा के अनुसार, सुनीता विलियम्स और उनकी टीम ने 150 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोगों पर 900 घंटे से अधिक शोध कार्य किया। इस दौरान उन्होंने आईएसएस पर बागवानी जैसे कार्यों में भी हिस्सा लिया।
स्पेसवॉक का सीधा अर्थ है, आईएसएस के बाहर खुले अंतरिक्ष में बिताए गए घंटे। 2006 में अपने पहले मिशन में सुनीता विलियम्स ने 29 घंटे स्पेसवॉक की थी। इतना ही नहीं आईएसएस पर रहते हुए उन्होंने 42.2 किलोमीटर दौड़कर बॉस्टन मैराथन में भी वर्चुअल तौर पर हिस्सा लिया था। सुनीता ने इस मिशन में कुल 195 दिन आईएसएस पर बिताए थे। इसके अलावा 2012-13 में भी सुनीता विलियम्स ने 21 घंटे से ज्यादा स्पेसवॉक की थी। इस मिशन में वे 127 दिन तक अंतरिक्ष पर रही थीं। इस तरह दो मिशन में उन्होंने कुल 321 दिन अंतरिक्ष में बिताए।
स्पेसवॉक का सीधा अर्थ है, आईएसएस के बाहर खुले अंतरिक्ष में बिताए गए घंटे। 2006 में अपने पहले मिशन में सुनीता विलियम्स ने 29 घंटे स्पेसवॉक की थी। इतना ही नहीं आईएसएस पर रहते हुए उन्होंने 42.2 किलोमीटर दौड़कर बॉस्टन मैराथन में भी वर्चुअल तौर पर हिस्सा लिया था। सुनीता ने इस मिशन में कुल 195 दिन आईएसएस पर बिताए थे। इसके अलावा 2012-13 में भी सुनीता विलियम्स ने 21 घंटे से ज्यादा स्पेसवॉक की थी। इस मिशन में वे 127 दिन तक अंतरिक्ष पर रही थीं। इस तरह दो मिशन में उन्होंने कुल 321 दिन अंतरिक्ष में बिताए।