केरल के मंदिरों में नहीं रुकेगा हाथी जुलूस
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश खारिज किया
नई दिल्ली, 19 मार्च (एजेंसियां)। सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के एक फैसले पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केरल के मंदिरों के भीतर हाथी जुलूस और उनके धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग में रोक को लेकर था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाथियों का मंदिरों में उपयोग हमारी संस्कृति का हिस्सा है और हाईकोर्ट का आदेश इसे रोकने की क्षमता रखता है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने यह रोक लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश सामाजिक संस्था गज सेवा समिति की याचिका पर दिया है। केरल हाईकोर्ट ने मंदिरों में हाथियों के उपयोग पर रोक लगाने का आदेश जनवरी 2025 में दिया था। याचिका दाखिल करने वाली संस्था गज सेवा समिति ने आरोप लगाया था कि हाथियों पर रोक लगाने की मांग करने वाले हिंदुओं की दो हजार साल से अधिक पुरानी परंपरा बंद करवाना चाहते हैं। गज सेवा समिति ने आरोप लगाया कि यह एक्टिविस्ट विदेशी फंड के सहारे काम करते हैं और यह हिंदुओं की परंपराओं को रोक रहे हैं।
गज सेवा समिति ने कहा कि हाथियों को केरल के भीतर पवित्र माना जाता है और उन्हें शक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। गज सेवा समिति ने आरोप लगाया कि कथित पशु अधिकार वाले पूरी तरह से मंदिरों में उनका इस्तेमाल रोकना चाहते हैं। केरल हाईकोर्ट ने मंदिर के उत्सवों में हाथियों के उपयोग पर रोक लगा दी थी। केरल हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2024 में रोक दिया था। इसके बाद भी जनवरी 2025 में केरल हाईकोर्ट ने नया ऐसा ही आदेश दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए केरल हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।