भारत विरोधी धन-दान पर देर से जागी सरकार
षडयंत्रकारी जॉर्ज सोरोस की संस्थाओं पर ईडी का छापा
2016 से ही सोरोस कर रहा था फेमा कानून का उल्लंघन
नेता, एनजीओ, नौकरशाह सब खा रहे थे सोरोस का पैसा
नई दिल्ली, 19 मार्च (एजेंसियां)। भारत के खिलाफ षडयंत्रों में लगे अमेरिकी धनपशु जॉर्ज सोरोस की फंडिंग संस्था ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (ओएसएफ) से जुड़े कई ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापामारी की। सोरोस से जुड़े कई संगठनों की जांच फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) के उल्लंघन मामले में की जा रही है। वर्ष 2016 में गृह मंत्रालय भारत में एनजीओ को अनियमित दान देने के मामले में ओएसएफ पर रोक लगाई थी। लेकिन ओएसएफ ने भारत सरकार के इस आदेश को ताक पर रख कर विभिन्न एनजीओ को धन देना जारी रखा। सोरोस का धन लेकर सारे एनजीओ भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय हैं।
फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) और कंसलटिंग फीस के नाम पर पैसा भारत लाकर ओएसएफ अलग-अलग एनजीओ को फंडिंग दे रहा था। ईडी अब ओएसएफ और उसके द्वारा भारत में लाए गए विदेशी निवेश की सभी फाइलें खंगाल रहा है। ईडी का स्कैनर एस्पाडा इंटरनेशनल नाम की एक कंपनी पर भी है। यह भारत के भीतर सोरोस इकॉनोमिक डेवलपमेंट फाउंडेशन (एईडीएफ) की सलाहकार है और मॉरिशस की एक कम्पनी की सब्सिडियरी कंपनी है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस द्वारा स्थापित ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (ओएसएफ) और इसकी निवेश शाखा, सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड (एसईडीएफ) से जुड़े बेंगलुरु में आठ स्थानों पर तलाशी ली। यह छापेमारी विदेशी मुद्रा उल्लंघन की जांच के तहत की गई। ओएसएफ और एसईडीएफ के कुछ लाभार्थियों के परिसरों, जिनमें कुछ अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकायों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। एस्पाडा इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी की विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत तलाशी ली गई। एस्पाडा इन्वेस्टमेंट भारत में एसईडीएफ का निवेश सलाहकार या फंड मैनेजर है। भारत में फंडिंग को चैनलाइज करने के लिए ओएसएफ ने मॉरीशस में एस्पाडा इन्वेस्टमेंट कंपनी की स्थापना की थी। भारत में एसईडीएफ के निवेश का प्रबंधन/सलाह देने के लिए 4 फरवरी, 2013 को बेंगलुरु में एस्पाडा इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड (एआईएपीएल) की स्थापना की गई थी। यह पता चला है कि एसईडीएफ ने भारत में 12 से अधिक कंपनियों को 300 करोड़ रुपए का वित्त पोषण किया।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि 30 मई 2016 को केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) द्वारा ओएसएफ को पूर्व संदर्भ श्रेणी (पीआरसी) के तहत रखा गया था। तब से, ओएसएफ को भारत में एफसीआरए पंजीकृत संगठनों को धन भेजने के लिए गृह मंत्रालय की पूर्व मंजूरी आवश्यक थी। भारत सरकार के प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए, ओएसएफ ने भारत में सहायक कंपनियां बनाईं और एफडीआई और परामर्श शुल्क के रूप में धन लाया, और इन निधियों का उपयोग एनजीओ की निधि देने के लिए किया गया। ईडी ने इसे स्पष्ट तौर पर फेमा का उल्लंघन बताया है।
ईडी एफडीआई फंड के उपयोग की भी जांच कर रहा है। एसईडीएफ को तीन भारतीय कंपनियों को एफडीआई या परामर्श/सेवा शुल्क की आड़ में एनजीओ क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने का दोषी पाया गया, जिन्हें कुल मिलाकर 2020-21 से 2023-24 तक लगभग 25 करोड़ रुपए मिले। ओएसएफ के अनुसार, यह मानवाधिकार, न्याय और जवाबदेह सरकार का समर्थन करने वाले समूहों की दुनिया की सबसे बड़ी निजी फंडिंग एजेंसियों में से एक है, जिसका 2020 में वार्षिक बजट एक बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है। ओपन सोसाइटी का सोरोस इकोनॉमिक डेवलपमेंट फंड भी भारत में एक सक्रिय सामाजिक प्रभाव निवेशक है। इसके लक्ष्यों में छोटे किसानों और छोटे व्यवसायों को उनकी आय बढ़ाने में मदद करना और स्वास्थ्य सेवा, स्कूली शिक्षा और वित्तीय सेवाओं को व्यापक लोगों के लिए अधिक उपलब्ध और सस्ता बनाना शामिल है, लेकिन इसके पीछे एजेंडा कुछ और है। 2008 से, ओपन सोसाइटी ने बेंगलुरु स्थित एस्पाडा इन्वेस्टमेंट्स द्वारा प्रबंधित स्टार्ट-अप और शुरुआती फंडिंग परियोजनाओं में 90 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है। भारत सरकार ने सोरोस पर भारत के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया है। पिछले साल दिसंबर में, लोकसभा में यह मामला उठा कि सोरोस, समाचार पोर्टल ओसीसीआरपी (संगठित अपराध और भ्रष्टाचार रिपोर्टिंग परियोजना) और कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी के साथ मिल कर भारत की सफलता की कहानी को पटरी से उतारने और सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।
ईडी द्वारा मारे गए छापे विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के उल्लंघन के संबंध में कर्नाटक के कई हिस्सों के साथ-साथ बेंगलुरु में सोरोस की तथाकथित उदारता के लाभार्थियों पर मारे जा रहे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल, ग्रीन पीस और ह्यूमन राइट्स वॉच के छह से अधिक कर्मचारी उन लोगों में शामिल हैं जिनसे उनके खातों में धन की एक किस्त के संबंध में पूछताछ की जा रही है। भारत में सोरोस समर्थित ओएसएफ पर छापेमारी के दौरान राजेश भट्टाचार्य और दिव्या रघुनाथन सहित कम से कम चार कर्मचारियों से ईडी अधिकारियों द्वारा पूछताछ की जा रही है।
ओएसएफ ने भारत और विदेश में एमनेस्टी और एचआरडब्ल्यू दोनों को पिछले पांच वर्षों में अकेले भारत में 200 मिलियन डॉलर (1,500 करोड़ रुपए) से अधिक का उदार दान दिया है। कुछ अधिकारियों का अनुमान है कि भारत में सोरोस ने एक दशक के दौरान करीब 18 बिलियन डॉलर दान दिया जिसमें वॉचडॉग, समाचार पोर्टल, शोध परियोजनाएं, सेमिनार, सम्मेलन थिंक टैंक और यहां तक कि सेवानिवृत्त और वर्तमान सिविल सेवकों की संतानें तक इसकी लाभान्वित रहीं। बेंगलुरु में एक अधिकारी ने कहा, 2016 और 2023 के बीच, ईडी ने एमनेस्टी इंटरनेशनल के कई खाते जब्त किए हैं। ये छापे ओएसएफ के और अधिक फंडिंग पैटर्न का पता लगाने के लिए नए हैं, जिनका इस्तेमाल भारत में गैरकानूनी तरीके से विरोध प्रदर्शन या शांतिपूर्ण कार्यों को बाधित करने के लिए किया जा रहा था। अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस और उसके संगठन ओएसएफ पर भारत के हितों के खिलाफ काम करने का गंभीर आरोप है। अडाणी-हिंडनबर्ग मामले में भी जॉर्ज सोरोस की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।