वक्फ की सम्पत्ति पर गैर-मुस्लिमों का भी उतना ही हक है
बिहार के राज्यपाल विद्वतपुरुष आरिफ मोहम्मद खान का वक्तव्य
विरोध करने वाले लोग राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त : शम्स
पटना, 05 अप्रैल (एजेंसियां)। बिहार के राज्यपाल विद्वतपुरुष आरिफ मोहम्मद खान ने वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करते हुए कहा कि वक्फ की सम्पत्तियां अल्लाह की मानी जाती हैं। इसका इस्तेमाल गरीबों, जरूरतमंदों और जनहित के लिए होना चाहिए। गैर मुस्लिमों का भी वक्फ की सम्पत्तियों में बराबर का हक है। उन्होंने कहा, भारत लोकतांत्रिक देश है। असहमति जताने का सबको अधिकार है। हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है। जब मैं यूपी में मंत्री था तब वक्फ विभाग मेरे पास ही था। हर समय मुझे ऐसे लोगों से मिलना पड़ता था, जिनके सम्पत्ति के मामले चल रहे थे। इसमें बहुत सुधार की जरूरत थी। यह वक्फ संशोधन विधेयक इसी दिशा में एक कदम है। राज्यपाल पटना में पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की 118वीं जयंती पर आयोजित राजकीय समारोह में बोल रहे थे।
राज्यपाल ने कुरान की आयत का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें दो प्रकार के जरूरतमंदों फकीर (मुस्लिम) और मिस्कीन (गैर मुस्लिम) का जिक्र किया गया है। इसका अर्थ है कि वक्फ से लाभान्वित होने का अधिकार हर जरूरतमंद को है। धर्म के आधार पर नहीं। पटना में वक्फ की बहुत प्रॉपर्टी है, लेकिन आप मुझे बताइए कोई एक संस्था है जो गरीब के लिए काम कर रही है। सिर्फ आपस में मुकदमेबाजी हो रही है। उन्होंने वैधता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वक्फ की अवधारणा को मुस्लिम देशों में भी गैर-इस्लामी माना गया, लेकिन 1913 में मोहम्मद अली जिन्ना द्वारा पेश एक्ट ने इसे वैधता दी। अब आप बताइए, इस दशा क्या होनी चाहिए।
इससे पहले 3 अप्रैल को बिहार के राज्यपाल ने यूपी दौरे के वक्त कहा था, मैं कुछ समय तक यूपी में वक्फ मंत्रालय में रहा था। मैंने केस के अलावा कुछ नहीं देखा। 1980 में मुस्लिम महिला सुरक्षा अधिनियम पारित हुआ। इसमें कहा गया था कि अगर तलाकशुदा महिला की देखभाल करने वाले कोई नहीं है तो उसे वक्फ बोर्ड की तरफ से भत्ता दिया जाएगा। दो साल बाद मैंने संसद में पूछा कि वक्फ बोर्ड ने क्या प्रावधान किया है और तलाकशुदा महिला को भत्ते के रूप में कितने राशि दी जाती है। मुझे जवाब मिला कि किसी भी वक्फ बोर्ड ने एक पैसे का प्रावधान नहीं किया है। वक्फ बोर्ड की हालत यह है कि उसके पास इतनी सम्पत्ति है और उनके पास वेतन देने के लिए पैसे नहीं हैं।
उधर, उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि जो लोग वक्फ (संशोधन) बिल का विरोध कर रहे हैं, वे पॉलिटिकल मुसलमान हैं। वे राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं। शादाब शम्स ने कहा कि इन दिनों वक्फ बिल के विरोध में पुतले दहन किए जा रहे हैं, जबकि पुतला दहन इस्लाम का हिस्सा नहीं है। इस्लाम में दहन का कोई कांसेप्ट ही नहीं है। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या अरब में दहन होता है? शादाब शम्स ने कहा कि पुतले दहन करने वाले या तो मुसलमान नहीं हैं या फिर ये पॉलिटिकल मुसलमान हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग गरीब मुसलमानों को गुमराह कर रहे हैं लेकिन अब गरीब मुसलमान समझ रहा है कि उसकी लड़ाई पूंजीपति मुसलमान से है, वक्फ माफिया से है और ऐसे लोगों से है जो वक्फ को अपने तक सीमित रखना चाहते हैं।
शादाब शम्स ने कहा कि ऐसे लोग जो गरीब मुसलमानों से छुआछूत करते हैं आज मुसलमानों से इकट्ठा होने के लिए कह रहे हैं। शम्स ने कहा कि जब कब्रिस्तान में मुसलमान को दफन करने का वक्त आता है तो पसमांदा मुसलमानों के साथ छुआछूत होती है और वहां पता चलता है कि यह ऊंची जातियों के मुसलमानों का कब्रिस्तान है। शम्स ने कहा कि यहां छोटी जातियों के लोगों को दफन होने की भी इजाजत नहीं है और यही सच्चाई है। उन्होंने कहा कि जो छोटी जाति का और पसमांदा मुसलमान इस दर्द को महसूस कर रहा है और इस दर्द को समझने का काम प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने किया है। उन्होंने कहा कि गरीबों और पसमांदा के हक की लड़ाई अब बीजेपी पूरी ताकत से लड़ेगी।
वक्फ (संशोधन) बिल को लेकर देश भर में चल रही जोरदार राजनीतिक जंग के बीच कांग्रेस के सांसद मोहम्मद जावेद, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बाद आपा विधायक अमानतुल्ला खान ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। विपक्षी दलों का दावा है कि वक्फ बिल भेदभाव करता है और मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है।