सौर ऊर्जा से लैस होंगे 75 जिलों के सरकारी भवन
उत्तर प्रदेश सरकार का फैसला
लखनऊ, 05 अप्रैल (एजेंसियां)। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में सरकारी भवनों को सौर ऊर्जा से लैस करने की प्रक्रिया जारी है। उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा अभिकरण (यूपीनेडा) सभी जिलों में सरकारी भवनों की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर रहा है। योजना के अनुसार, इसमें उन भवनों का नाम तो होगा ही जिन्हें 25 किलोवॉट व उससे ज्यादा क्षमता वाले सौर ऊर्जा आधारित ग्रिड युक्त किया गया है, साथ ही उन भवनों की लिस्ट भी तैयार होगी जो सौर ऊर्जा युक्त किए जाने के लिए चिह्नित हैं या फिर जिनमें किसी कारणवश प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। इस कार्य को यूपीनेडा द्वारा एक विशिष्ट टीम के गठन से पूरा किया जाएगा जिसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
यूपीनेडा द्वारा तैयाह होने वाले विस्तृत खाका में प्रदेश के सभी जिलों के सरकारी भवनों का लेखा-जोखा होगा। इसमें 25 किलोवॉट व उससे ज्यादा क्षमता वाले सभी ग्रिड कनेक्टेड सोलर रूफटॉप इंस्टॉलेशन वाले सरकारी भवनों का डाटाबेस विशिष्ट टीम करेगी। इसके अतिरिक्त, टीम द्वारा सौर ऊर्जा प्रणालियों के लिए उपयुक्त सरकारी भवनों की पहचान करने, विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने और यूपीईआरसी आरएसपीवी विनियम 2019 व इसके बाद के संशोधनों के अनुसार इन भवनों पर सौर फोटो वोल्टिक (एसपीवी) सिस्टम स्थापित करने की व्यवहार्यता का आकलन कर रिपोर्ट पेश किया जाएगा। इस कार्य को केवल जनपद मुख्यालय स्तर पर ही नहीं बल्कि शहर, तहसील, ब्लॉल व ग्राम स्तर पर भी पूरा किये जाने का लक्ष्य निर्धारित है। टीम द्वारा साइट सर्वेक्षण और डाटा संकलन किया जाएगा जिसके अनुसार प्रत्येक भवन के लिए विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करेगी।
प्रक्रिया के अंतर्गत, रिपोर्ट में जिन सरकारी भवनों को ग्रिड कनेक्टेड सोलर रूपटॉप इंस्टॉलेशन के लिए चिह्नित किया जाएगा उनमें स्थापना कार्य को पूरा करने के लिए एक डीटेल्ड एक्शन प्लान तैयार होगा। इसमें कॉम्प्रिहेंसिव प्रोसेस फ्रेमवर्क तथा बिजनेस रिक्वायरमेंट डॉक्यूमेंट (बीआरडी) रिपोर्ट का संकलन शामिल है। कार्य योजना के अनुसार यूपीनेडा इन इंस्टॉलेशन कार्यों को पूरा करने के लिए पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (पीएसयू) से हाथ मिलाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, प्रक्रिया के आखिरी चरण में डिजिटल सौर मानचित्र का निर्माण किया जाएगा जिसमें प्रत्येक जिले में रूफ टॉप सोलर इंस्टॉलेशन वाले सरकारी भवनों का विवरण होगा। इसे बाद में एकीकृत करके प्रदेश स्तर पर एक डिजिटल सौर मानचित्र के गठन के कार्य को भी पूरा किया जाएगा