80 दिन में ढेर हुए 119 नक्सली
नक्सलियों के खिलाफ आरपार की लड़ाई
देश में नक्सलवाद समाप्ति की ओर
रायपुर, 21 मार्च (एजेंसियां)। इस साल सुरक्षाबलों को नक्सलियों के खिलाफ लगातार बड़ी सफलताएं हाथ लगी हैं। अब तक तीन ऐसे ऑपरेशन छत्तीसगढ़ में हो चुके हैं, जिनमें एक दर्जन से ज्यादा नक्सली एक साथ मार गिराए गए। छत्तीसगढ़ में इस साल (2025) अब तक 119 नक्सली मार गिराए गए हैं।
2025 के पहले दिन से ही सुरक्षाबलों ने नक्सलियों पर शिकंजा कसना चालू कर दिया था। 2 जनवरी 2025 को बीजापुर में हुई मुठभेड़ में 5 नक्सली मारे गए थे। उसके बाद यह सिलसिला चलता ही रहा। 16 जनवरी को हुई एक मुठभेड़ में 18 नक्सली मार गिराए गए थे। 21 जनवरी 2025 को गरियाबंद पहाड़ी पर हुई एक मुठभेड़ में 16 नक्सली मारे गए थे। इनमें नक्सलियों का टॉप कमांडर चलापति भी था। चलापति ₹1 करोड़ का इनामी नक्सली था। उसके साथ ही एक-दो और भी बड़े कमांडर मारे गए थे। इस वर्ष की सबसे बड़ी मुठभेड़ 9 फरवरी को हुई थी। नेशनल पार्क क्षेत्र में हुए ऑपरेशन के दौरान यहां 31 नक्सली मार गिराए गए थे। यह ऑपरेशन महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सुरक्षाबलों ने मिलकर किया था। यह हमला नक्सलियों की एक मीटिंग पर हुआ था। इसी तरह के बड़े ऑपरेशन के चलते नक्सलियों की अब कमर टूट गई है। सुरक्षाबल अब उन इलाकों में घुस रहे हैं, जहां पहले नक्सली एकक्षत्र राज कर रहे थे। उन्हें ग्रामीणों से मिलने वाला समर्थन भी अब कम हो चुका है। दुर्गम इलाकों में चौकियां बनाने के चलते सुरक्षाबल उनकी हर एक मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं।
वर्ष 2024 भी नक्सलियों के लिए अच्छा नहीं रहा था। उस साल 290 नक्सली अलग-अलग मुठभेड़ में मार गिराए गए थे। इनमें से 239 नक्सली छतीसगढ़ में मारे गए थे। 2024 में भी 4 ऐसे बड़े ऑपरेशन हुए थे, जिनमें एक दर्जन अधिक नक्सली मारे गए थे। इसमें सबसे बड़ा ऑपरेशन 4 अक्टूबर, 2024 को हुआ था। 4 अक्टूबर, 2024 को दंतेवाड़ा के थुलथुली में 38 नक्सलियों का सफाया एक ही ऑपरेशन में हो गया था। 16 अप्रैल, 2024 को हुए एक ऑपरेशन में भी 29 नक्सली मारे गए थे। रिपोर्ट बताती हैं कि 2024 के भीतर 100 से अधिक एनकाउंटर हुए थे। इनमें ₹9 करोड़ से अधिक के इनामी नक्सली खत्म किए गए थे।
सुरक्षाबल नक्सलियों का सिर्फ एनकाउंटर ही नहीं कर रहे हैं, उन्हें मुख्यधारा से भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। नक्सलियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि अगर वह हिंसा का रास्ता छोड़ते हैं तो उन्हें सरकार सारा समर्थन देगी लेकिन हथियार उठाने पर उनके पास कोई रास्ता नहीं होगा। गृह मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 2024 में 881 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के अलावा तेलंगाना में भी आत्मसमर्पण किया है। यह सिलसिला 2025 में भी जारी है। 2025 में अब तक सुरक्षाबलों के सामने 104 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। जंगल में ठिकाने न बना पाने के चलते भी नक्सली गिरफ्तार हो रहे हैं। वर्ष 2024 में 1090 में नक्सली गिरफ्तार किए गए थे। 2025 में 104 नक्सली गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनके खिलाफ अब कार्रवाई चल रही है।
लगातार एनकाउंटर, आत्मसमर्पण और गिरफ्तारियों के चलते नक्सली अंतिम सांसें गिन रहे हैं। इसका असर भी दिख रहा है। 2014 में जब मोदी सरकार आई थी, तो 126 जिले नक्सली हिंसा से प्रभावित थे। अब यह संख्या लगभग 90 प्रतिशत घट चुकी है। वर्तमान में मात्र 12 जिले ही नक्सल हिंसा से प्रभावित हैं। इनमें से भी कई जिले आंशिक रूप से ही प्रभावित हैं। हिंसा की घटनाएं भी आधी हो चुकी हैं। वर्ष 2004 से 2014 के बीच नक्सली हिंसा की कुल 16,463 घटनाएं हुई थीं, जबकि मोदी सरकार में 2014 हिंसक घटनाओं की संख्या 53 प्रतिशत घटकर 7744 हो गई। नक्सली हमलों में जान गंवाने वाले सुरक्षाबलों और नागरिकों की संख्या में भी मोदी सरकार में गिरावट हुई है।
2004 से 2014 के बीच देश में अलग-अलग नक्सली हमलों में 1851 जवानों की वीरगति हुई थी। इसी दौरान दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में हुए एक हमले में 76 जवानों को जान गंवानी पड़ी थी। 2011 में झीरम घाटी में हुए एक हमले में राज्य के कांग्रेस नेतृत्व को नक्सलियों ने मार दिया था। इस हमले में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल भी मारे गए थे। लेकिन 2014 के बाद से नक्सली हमले में जवानों की शहादत एक तिहाई से भी कम हो चुकी है। 2014 से 2024 के बीच 509 जवान हमलों में मारे गए हैं। इस दौरान नागरिकों की मौतों में भी कमी आई है। 2004 से 2014 के बीच 4700 से अधिक नागरिकों को जान गंवानी पड़ी थी। 2014 के बाद से यह संख्या लगभग 1400 हो चुकी है।
केंद्र सरकार ने साफ़ कर दिया है कि अब नक्सलवाद ज्यादा दिन देश में नहीं चल सकता। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षाबलों को लक्ष्य दिया है कि वे 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त कर दें। इसी कड़ी में यह बड़े ऑपरेशन और गिरफ्तारियां चल रही हैं।